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फसलों के अवशेषों को जलाने वालों के विरूद्ध हो कड़ी कार्रवाई: डीएम

उत्तर प्रदेश बहराइच 12 सितम्बर। जिलाधिकारी शम्भु कुमार ने कृषि, राजस्व, विकास, पुलिस तथा अन्य सम्बंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसी भी दशा में फसलों के अवशेष न जलाये जायें। उन्होंने कृषकों के मध्य फसल अवशेष जलाने से मिट्टी, जलवायु एवं मानव स्वास्थ्य को होने वाली हानि के विषय में व्यापक रूप से जागरूक कराये जाने का निर्देश दिया है। कुमार ने यह भी निर्देश दिया है कि किसानों के मध्य इस बात का भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाय कि फसलों के अवशेष को जलाना दण्डनीय है। ऐसा करने पर किसानों को अर्थ दण्ड से दण्डित किया जा सकता है।
जिलाधिकारी ने समस्त ग्राम प्रधानों, लेखपालों व ग्राम पंचायत अधिकारियों के साथ-साथ कृषि विभाग के प्राविधिक सहायक, बी.टी.एम. व ए.टी.एम. को निर्देश दिया है कि अपने-अपने कार्य क्षेत्र में यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी खरीफ फसल के अवशेष न जलने पाये, इसके लिए जो भी आवश्यक कदम उठानें हो, उसको उठाया जाये। फसल अवशेष जलाने की घटनाएं सामने आने पर सम्बंधित लेखपाल/नोडल अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए उनके विरूद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।
जिलाधिकारी ने समस्त थाना प्रभारियों को निर्देशित किया है कि अपने-अपने क्षेत्रों में फसल अवशेष जलाये जाने की घटनायें रोकने के लिए प्रभावी कार्यवाही करना सुनिश्चित करें तथा किसी भी दशा में अपने क्षेत्र में फसल अवशेष जलाये जाने की घटनायें न होने दें। कोई किसान पराली जलाता है तो उसके विरूद्ध आई.पी.सी. तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण के प्रावधानों के तहत जुर्माना लगाया जाये। घटना की पुनरावृत्ति होने पर एफआईआर दर्ज करायी जाय। इसी सन्दर्भ में समस्त अधिशासी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कूड़ा जलने की घटना भी न होने पायें।
 कुमार ने यह भी निर्देश दिया कि जनपद में चलने वाली प्रत्येक कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ कृषि विभाग का एक कर्मचारी नामित रहे जो कि अपनी देख-रेख में कटाई का कार्य करायेगा। उन्होंने सम्बन्धित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि कोई भी कम्बाइन हार्वेस्टर, सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम अथवा सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम अथवा स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा रेक एवं बेलर के बगैर चलते हुई पायी जाये तो उसको तत्काल सीज कर दिया जाये।
जिलाधिकारी ने बताया कि फसलों के अवशेष को जलाने वाले दोषी व्यक्तियों की पुष्टि होने पर दो एकड़ क्षेत्रफल तक रू. 2500, दो से पांच एकड़ तक रू. 5000 तथा पांच एकड़ से अधिक पर रू. 15000 अर्थदण्ड लगाया जाए तथा घटना की पुनरावृत्ति से सम्बन्धित मामलों में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम की धारा-26 एवं एक्ट सं. 14/1981 की धारा-19 के अन्तर्गत अभियोजन की कार्यवाही कर नियमानुसार कारावास या अर्थदण्ड या दोनों से दण्डित कराया जायेगा। कुमार ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी फसलों के अपशिष्ट न जलाकर उसका वैज्ञानिक ढ़ग से उपयोग कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति में वृद्धि करते हुए अपनी उत्पादकता बढ़ायें जिससे वातावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।

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